भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में (फरवरी 2026) हुआ अंतरिम व्यापार समझौता (Interim Trade Agreement) दोनों देशों के आर्थिक संबंधों के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ माना जा रहा है। भारतीय सरकार, विशेषकर वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट किया है कि इस समझौते में भारतीय किसानों के हितों को सर्वोपरि रखा गया है।

  1. किसानों के लिए ‘सुरक्षा कवच’ (Safeguarding Farmers)
    भारत ने इस समझौते में अपने संवेदनशील कृषि और डेयरी क्षेत्रों को पूरी तरह सुरक्षित रखा है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका से आने वाले उन उत्पादों पर कोई रियायत नहीं दी गई है जो भारतीय किसानों की आजीविका को प्रभावित कर सकते हैं।

  • इन उत्पादों पर कोई छूट नहीं: गेहूं, चावल, मक्का (Maize), सोयाबीन, चीनी, मूंग, और तिलहन जैसे प्रमुख अनाज और दालों को इस समझौते से बाहर रखा गया है।
  • डेयरी सेक्टर सुरक्षित: दूध, मिल्क पाउडर, पनीर (Cheese), घी, मक्खन और दही जैसे डेयरी उत्पादों के आयात के लिए भारत ने अपने बाजार नहीं खोले हैं।
  • पशुपालन और मांस: मांस और पोल्ट्री (Poultry) उत्पादों को भी पूरी तरह से प्रतिबंधित या सुरक्षित श्रेणी में रखा गया है।

  1. बाजार पहुंच और टैरिफ में कटौती (Market Access & Tariffs)
    समझौते के तहत, अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर लगने वाले भारी टैरिफ को कम करने पर सहमति जताई है:

  • अमेरिकी टैरिफ: अमेरिका ने भारतीय सामानों पर टैरिफ को 50% से घटाकर 18% कर दिया है। कई भारतीय कृषि उत्पाद अब अमेरिका में शून्य शुल्क (Zero Duty) पर निर्यात किए जा सकेंगे।
  • भारत द्वारा रियायतें: भारत ने कुछ चुनिंदा अमेरिकी उत्पादों जैसे बादाम (Tree nuts), ताजे और प्रसंस्कृत फल (जैसे सेब पर न्यूनतम आयात मूल्य ₹50 से बढ़ाकर ₹80 किया गया), वाइन, स्पिरिट और पशु आहार (जैसे लाल ज्वार) पर शुल्क कम या समाप्त करने का निर्णय लिया है।

  1. भारतीय निर्यातकों को लाभ
    इस डील से भारत के कृषि और MSME क्षेत्र के लिए 30 ट्रिलियन डॉलर के वैश्विक बाजार के रास्ते खुलने की उम्मीद है।

  • मसाले और चाय: भारतीय मसालों और चाय के निर्यात में बड़ी बढ़ोतरी की संभावना है, क्योंकि अमेरिका ने इन पर ड्यूटी कम की है।
  • बासमती चावल: बासमती चावल पर टैरिफ कम होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी पहुंच और अधिक प्रतिस्पर्धी होगी।
  • समुद्री उत्पाद: सीफूड (Shrimps) और मछली पालन से जुड़े निर्यातकों को भी इस समझौते से सीधा लाभ मिलेगा।

  1. रणनीतिक और आर्थिक प्रभाव

  • $500 बिलियन का वादा: भारत ने अगले 5 वर्षों में अमेरिका से लगभग 500 अरब डॉलर के ऊर्जा (Energy), विमान (Aircraft) और हाई-टेक उत्पादों को खरीदने की प्रतिबद्धता जताई है।
  • चीन को चुनौती: यह समझौता चीन पर निर्भरता कम करने और एक लचीली (Resilient) ग्लोबल सप्लाई चेन बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।
  • रोजगार: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अनुसार, इस समझौते से युवाओं और महिलाओं के लिए लाखों नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।